BREAKING: ऑल इंडिया शिया यूथ पंच रत्न बरेली उत्तर प्रदेश, के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज़हीर अब्बास (राजा साहब) ने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष से दरगाहे आलिया नजफ़े हिन्द जोगीपुरा की नवीन कमेटी के बनाये जाने की रखी मांग।

 


JUNE 10, 2024 MONDAY
National Hussaini 72 News

बरेली: ऑल इंडिया शिया यूथ पंच रत्न बरेली उत्तर प्रदेश, के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज़हीर अब्बास (राजा साहब) का एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अली जैदी के नाम एक दरख्वास्त भेजी है जिसमें उन्होंने दरगाहे आलिया नजफ़े हिन्द जोगीपुरा की नवीन कमेटी के बनाये जाने की अपील की है। 

ज़हीर अब्बास ने अपनी दरख्वास्त में कहा है कि दरगाहे मौला अली, जोगीपुरा क़ी कमेटी में ज़्यादातर ज़िला बिजनौर मुरादाबाद अमरोहा के शियों को ही मुत्तावाली /अध्यक्ष /सदस्य बनाया जाता है, जबकि दरगाह के आस पास के बहुत से ज़िलों के शियों को कमेटी में सदस्य तक नहीं बनाया जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या दरगाह पर इन्ही ज़िलों के लोगो को ही कमेटी में जगह मिलेगी? जबकि दरगाह के 100 किलोमीटर से 250 किलोमीटर तक के दायरे में 9 ज़िलें ऐसे आते है, जिसमे शिया अक्सरियत अच्छी खासी तादात में है। ज़्यादातर इन ज़िलों के शिया दरगाह क़ी ज़्यारत पर नज़दीक होने क़ी वजहा से ज़्यादा शिरकत करते है जैसे मेरठ, सहारनपुर, मुज़फ्फरनगर, बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर बरेली,अलीगढ आदि। लेकिन बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद को छोड़कर बाकि के ज़िलों के लोगो को दरगाह क़ी कमेटी से हमेशा दूर रखा जाता है। क्या और ज़िलों के शिया दरगाह क़ी कमेटी के लायक नहीं है या इसमें भी कोई भेदभाव है?

उन्होंने आगे कहा कि दौराने मजालिस (मकसूसीयों) में पूरब से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शिया ज़ायरीन दरगाह ज़्यारत के लिए पहुंचते है। हरदोई, लखनऊ, जौनपुर, इलाहाबाद सुल्तानपुर, रायबरेली, आजमगढ़, अकबरपुर,उन्नाव,बनारस,गाज़ीपुर के अलावा और भी दीगर ज़िलें है जिन ज़िलों में अच्छी अक्सरियत में शिया रहते है जो दौराने मजलिसो में दरगाह पर शिरकत करते है। दौराने मकसूसी में सिर्फ बिजनौर, अमरोहा, मुरादाबाद के ज़िलों के शियों क़ी ही चलती है। ज़्यदातर इन्ही ज़िलों के शियों को दरगाह के कुंवाटर मोहिय्या कराये जाते है। पूरब के ज़िलों से आए हुए ज़ायरीनो को कितनी दिक्कत का सामना करना पड़ता है ये वहीं लोग जानते है दो दिन का ट्रेनों और बसों में इतनी गर्मी में छोटे छोटे बच्चो और बुज़ुर्गो के साथ जैसे तैसे सफ़र करके दरगाह पहुंचते है। दरगाह क़ी कमेटी में कोई भी उनका पुरसाने हाल नहीं होता है पहली मजलिस का पुरा एक दिन उनको टेंट लगवाने में लग जाता है। मजलिसो के अगले दिन नज़दीकी ज़िलों के ज़्यारीन अपने घर पहुंच जाते है, लेकिन पूरब के ज़िलों से आए हुए ज़ायरीन कितनी मशाक्क्त के बाद अपने ज़िलों में पहुचे है, ये मौला ही जानते है। लिहाज़ा इन सब दिक्कतों को देखते हुए ऑल इंडिया शिया यूथ पंच रत्न शिया सेन्ट्रल वफ्क बोर्ड के चेरमैन साहब से मांग करती है क़ि दरगाह क़ि नवीन कमेटी में पश्चिम के 9 ज़िलों के शियों को रखा जाये, जिससे किसी एक ज़िलें के लोगो क़ि दरगाह पर हटधर्मी न चल सके। उसके साथ साथ दरगाह की कमेटी में पूरब के ज़िलों के शियों को भी सदस्य बनाया जाये जिससे दौराने मजलिसो में एक सूचना सहयता केन्द्र कैम्प लगाया जाये जिसमे कमेटी में मौजूद सदस्य अपने अपने ज़िलों के लोगो के साथ अन्य जनपद से आए हुए ज़ायरीनो की किसी भी तरहा की दिक्कत को कमेटी तक पहुँचय और कमेटी ज़ायरीनो के समस्या का समाधाकरें

         तकी रज़ा               






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